गुरु महिमा पर प्रेरणादायक कविता | गजेंद्र कुमार ‘भोला’ द्वारा रचित
अंधकार में ज्योति की कीमत,
सीप में मोती की होती।
देह में जैसे आत्म-तत्त्व की,
जीवन में गुरु की होती।।
गुरु बिना ना मिटे अंधेरा,
गुरु बिना कहीं ज्ञान नहीं।
गुरु कृपा जिसपर होती,
उससे बड़ा महान नहीं।।
गुरु ही हमको राह दिखाते,
जीवन को भी चमकाते।।
वे सच्चे जौहरी होते,
पत्थर से हीरा घढ़ जाते।।
तपते मरू की शांत पिपासा,
जलद बूंद कर जाती है।।
हिय - द्वन्द की व्याकुलता,
गुरु शरणम् से मिट जाती है।।
गुरु धर्म है, गुरु मनन है,
ध्यान गुरु से पाया है।।
कर्मयोग, मिलता गुरुओं से,
श्री गीता में बतलाया है।।
गुरु मिले तो कहे कबीरा,
तीन लोक की हस्ती क्या॥
कोटि-लोक भ्रमण कर देखे,
रामानन्द सी बस्ती ना॥
गुरु का आसन सबसे ऊँचा,
ज्ञानी-ध्यानी बतलाते॥
गुरु के आगे राम-कृष्ण भी,
मस्तक नीचा कर जाते॥
गुरु ही है अनमोल रतन,
गुरुहीन की कीमत क्या होती॥
देह में जैसे आत्म-तत्व की,
जीवन में गुरु की होती॥
📜 निष्कर्ष (Conclusion):
गुरु केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण और जीवन के अंधकार को दूर करने वाले प्रकाश-स्तंभ होते हैं। वे ज्ञान, शांति, दिशा और आत्मिक उन्नति के प्रेरणास्रोत होते हैं। जैसे शरीर के लिए आत्मा अनिवार्य है, वैसे ही जीवन के लिए गुरु का होना परम आवश्यक है।
गुरु की शरण में जाना, आत्मा की यात्रा को पूर्णता की ओर ले जाना है।
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