अनमोल यादें – गजेंद्र कुमार भोला द्वारा रचित एक हृदयस्पर्शी हिंदी कविता।

नए रिश्तो की राह दिखाकर ।

आँखो से आँसू छलका कर ॥

डोली में मुझको बैठाकर ।

कहते थे हुइ पराई 

पापा याद तुम्हारी आई ।

 

मन भावन सावन आने पर |

काली बदली के छाने पर ||

बचपन में बैठा काँधे पर |

मेले खूब घुमाई ||

पापा याद तुम्हारी आई |

 

बारिस की जब बूँदे पड़ती |

गलियों की जब नदिया बनती ॥

पानी के संग छप-छप करती |

मीठी डाँट लगाई ||

पापा याद तुम्हारी आई |

 

लौट काम से जब घर आते ।

चौखट से आवाज लगाते ||

जेबे अपनी भर-भर लाते |

लाते रस मलाई ||

पापा याद तुम्हारी आई |

 

सांझ ढले जब खटिया बिछती ।

परियो की मैं कहानी सुनती ||

 उछल-कूद जब नीचे गिरती |

सीने से खूब लगाई ||

पापा याद तुम्हारी आई |

 

खुशियों की दीवाली आती।

रंगगोली से चौक सजाती ||

देहली पर रख दीया-बाती |

फूलझडियाँ चलवाई ||

पापा याद तुम्हारी आई |

 

बाँह पकड विद्यालय जाती ।

बैग में खट्‌ठी इमली लाती ||

पगडंडी से जामुन ठाती |

चुन-चुन खूब खिलाई ||

पापा याद तुम्हारी आई |

 

जब से तुम परलोक गए हो  |

यादें ही बस छोड़ गए हो ||

क्या इतने मजबूर हुए हो |

चिटठी भी ना आई ||

पापा याद तुम्हारी आई |

 

 

 


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