कर्मयोगी: कर्म, धर्म और मोक्ष: एक आत्ममंथन
गजेन्द्र कुमार जी की कविता "कर्मयोगी" कर्मयोग के महत्व और उसके प्रभाव को दर्शाती है। यह कविता बताती है कि मोक्ष परलोक में नहीं, बल्कि इस धरती पर कर्मों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। मृत्यु एक अटल सत्य है, लेकिन जो व्यक्ति धर्म और सत्य के मार्ग पर चलता है, वह सहज भाव से प्राण त्यागता है, जबकि अधर्म करने वाले को मृत्यु का भय सताता है। महाभारत के पात्रों के उदाहरणों से यह स्पष्ट किया गया है कि जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। अधर्मी व्यक्ति, जैसे कंस और दुर्योधन, अपने अहंकार और पाप के कारण पतन को प्राप्त हुए। वहीं, अर्जुन और युधिष्ठिर जैसे कर्मयोगियों ने धर्म का पालन कर जीवन को सार्थक बनाया। श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता का ज्ञान हमें सिखाता है कि हमें फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। कविता का मुख्य संदेश यह है कि सच्चा कर्मयोगी वही है जो निष्काम भाव से कर्म करता है और मृत्यु के भय से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है। मोक्ष नहीं परलोक की बातें | मोक्ष धरा पर देखा है || कर्मयोगी को सहज भाव से | प्राण त्यागते देखा है || मृत...